शिवप्रिया की शिवसिद्धि…22

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शिवप्रिया की शिवसिद्धि…22
आदि शक्ति ने ब्रह्मज्ञान का रहस्य खोला
【देवी ने शिवप्रिया को निर्देश दिया कि कुछ समय पश्चात एक साध्वी आएंगी। गणेश और नारद की तरह वे अपनी साधना से ब्रह्मज्ञान का कुछ और भाग अवमुक्त कराएंगी। तुम्हें उनकी सहायता करनी है। लगभग 10 साल बाद वे खुद तुमसे संपर्क करेंगी। तब तुम इस साधना से अर्जित सिद्धि से उनका सहयोग करना। उनका मार्गदर्शन करना।】

सभी अपनों को राम राम
शिवप्रिया की गहन साधना का विशेष दिन। आदिशक्ति ने संपर्क किया। ब्रह्मज्ञान का गूढ़ रहस्य बताया। उच्च साधक इसे सावधानी से समझें और हमेशा याद रखें।
मन्त्र जप के कुछ घण्टे बाद त्रिदेवों के दर्शन हुए। वे एक ही शरीर में थे। एक ही शरीर के पार्ट थे। एकरूप त्रिदेव शिवप्रिया की चेतना से सम्बद्ध हुए। फिर कुछ समय बाद विलुप्त हो गए।
उसके बाद शिवप्रिया को लगा कोई कुछ बताने की कोशिश कर रहा है। मगर कोई नजर नही आया। उनकी चेतना ने आयाम बदला। एक तरफ से आवाज आती सुनाई दी। किंतु शिवप्रिया उसे डिकोड नही कर पा रही थीं, समझ नही पा रही थीं।
ऐसे में शिवप्रिया की नाभि में स्थापित शिवलिंग ने मदद की। उसमें से तेज प्रकाश निकलने लगा। वे प्रकाश में घिर गईं। कुछ क्षणों बाद एक देवी की आवाज स्पष्ट हुई। अब शिवप्रिया उन्हें सुन और समझ पा रही थीं।
देवी ने बताया ब्रह्मा जी के पास संसार का सबसे अनमोल रत्न है, वह है ब्रह्मज्ञान। फिर भी उनकी पूजा नही की जाती। क्योंकि एक बड़ी योजना के तहत उन्हें संसार के संपर्क से अलग रखा गया है।
ब्रह्माजी पर ब्रह्मांड का बहुत बड़ा दायित्व है। जिसे वे अपने ज्ञान के द्वारा पूरा करते हैं। यदि कोई व्यक्ति, देव या दानव ब्रह्माजी की साधना करके उनके ब्रह्मज्ञान का 4 प्रतिशत हिस्सा भी जान ले और उसका उपयोग कर ले। तो वह संसार की सभी शक्तियों को परास्त कर सकता है। पूरे संसार को अपने अधीन कर सकता है। इस तरह किसी की ब्रह्म सिद्धि संसार के लिये अनर्थ का कारण बन सकती है। पूर्व में ऐसा कई बार हो भी चुका है। इसीलिये लोगों को ब्रह्माजी से दूर रखने हेतु उनकी पूजा, साधना, आराधना को वर्जित किया गया है।
ब्रह्मा पुत्रों का ज्ञान, वेदों का ज्ञान, पुराणों का ज्ञान, ऋषियों, मुनियों का ज्ञान, ब्रह्मांड के रहस्यों का ज्ञान, विज्ञान का ज्ञान और जो भी ज्ञान हम प्राप्त कर सकते हैं, वह सम्पूर्ण ब्रह्मज्ञान का सिर्फ ढाई प्रतिशत ही है। बाकी का ज्ञान जीवों के लिये वंचित है। अभी संसार में ब्रह्मज्ञान का ढाई प्रतिशत भाग ही खुल पाया है। उसी से सारा संसार चल रहा है। देव, दानव, मनुष्य सहित सभी जीव उसी से संचालित हो रहे हैं।
जब कोई बड़ा साधक जनकल्याण के लिये साधनाएं करता है तब ब्रह्मज्ञान का कुछ भाग अवमुक्त होता है। उसके रहस्य सामने आते हैं।
ऐसी साधना करने वालों में गणेश जी अब तक सर्वोपरि रहे हैं। उनसे पहले संसार का संचालन ब्रह्मज्ञान के एक प्रतिशत भाग से हो रहा था। उन्होंने अनवरत साधनाएं करके ब्रह्मज्ञान का एक प्रतिशत हिस्सा और अवमुक्त कर लिया। उसे जनकल्याण में सार्वजनिक किया। इस तरह संसार को दो प्रतिशत ब्रह्मज्ञान प्राप्त हुआ। संसार में विज्ञान प्रसार बढ़ा। जीवन स्तर में उत्तरोत्तर उन्नति हुई।
समय समय विभिन्न ऋषियों, मुनियों ने ऐसी साधनाएं कीं। नारद जी, ऋषि अथर्वा, ऋषि वशिष्ठ, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि क्रतु क्रज्ञ, ऋषि अगस्त, ऋषि अंगिरा, बाल्मीकि जी सहित कई आध्यात्मिक हस्तियों ने उच्च साधनाएं करके ब्रह्मज्ञान का कुछ भाग अवमुक्त कराया। इस तरह संसार को ढाई प्रतिशत ब्रह्मज्ञान मिला।
बहुत बार तमाम देवी देवताओं और ऋषियों मुनियों ने कठोर तप करके ब्रह्मज्ञान से जुड़ने की कोशिश की। वे उस तक पहुंच भी गए। किंतु वे उसे समझ नही पाए। इसलिये उपयोग नही कर पाए। क्योंकि ब्रह्माजी की सहमति के बिना उस ज्ञान को डिकोड नही किया जा सकता। ब्रह्म सहमति के लिये ज्ञान की देवी सरस्वती ही माध्यम हैं।
इसलिये ब्रह्मा स्वरूप में उस परमात्मा की आदि अर्धांगिनी ने सरस्वती के रूप में ज्ञान की देवी का स्वरूप लिया है। ताकि ब्रह्मज्ञान का उतना ही हिस्सा संसार तक पहुंच सके जिससे संतुलन बना रहे। अवमुक्त ब्रह्मज्ञान देवी सरस्वती के माध्यम से ही संसार में संचारित है।
ब्रह्मज्ञान का उपयोग करके माता पार्वती ने गणेश जी को उत्पन्न किया। किंतु ब्रह्मा जी की आज्ञा न होने के कारण उन्होंने उस ज्ञान को संसार में सार्वजनिक नही किया। ब्रह्मज्ञान से ही शिव जी ने गणेश के कटे सिर की जगह हाथी का सिर जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया।
त्रिदेव और उनकी अदिशक्तियाँ ब्रह्मज्ञान व उसके रहस्यों से वाकिफ हैं। उनका उपयोग करते हैं। वे उसके उपयोग, दुरुपयोग के परिणामों को भलीभांति समझते हैं। इसीलिये ब्रह्माजी को सांसारिक मोहमाया से प्रथक लोगों से दूर रखने की देव व्यवस्था तय हुई। ब्रह्मज्ञान की सुरक्षा की जिम्मेदारी ब्रह्माजी की है। इसीलिये ब्रह्माजी को ब्रह्मांड से दूर और जीवों को उनकी आराधना से दूर रखा गया है।
देवी ने शिवप्रिया को निर्देश दिया कि कुछ समय पश्चात एक साध्वी आएंगी। वे अपनी साधना से ब्रह्मज्ञान का कुछ और भाग अवमुक्त कराएंगी। तुम्हें उनकी सहायता करनी है। लगभग 10 साल बाद वे खुद तुमसे संपर्क करेंगी। तब तुम इस साधना से अर्जित सिद्धि से उनका सहयोग करना। उनका मार्गदर्शन करना।
इस निर्देश के साथ ही देवी की आवाज आनी बन्द हो गयी। शिवप्रिया का मन्त्र जप रुक गया।
चेतना शरीर में वापस आ गयी। आंख खुली। साधना के आठ घण्टे पूरे हो चुके थे।
शिव शरणं!

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