शिवप्रिया की शिवसिद्धि…18

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शिवप्रिया की शिवसिद्धि…18
पिछले जन्म की मृत्यु का कारण पता चला

शिवप्रिया ने खुद को अपने सूक्ष्म शरीर के पास खड़ी पाया। मार्गदर्शक ने उन्हें सूक्ष्म शरीर में प्रवेश कराया और विलुप्त हो गए।
सभी अपनों को राम राम
शिवप्रिया की गहन साधना की अनुभूतियों से अन्य साधक सूक्ष्म जगत के रहस्य से परिचित हो रहे हैं। इस बीच आज से तमाम साधक घर बैठे इस अलौकिक साधना का हिस्सा बनेंगे। शिवप्रिया की चेतना से जुड़कर वे सूक्ष्म यात्राएं कर सकेंगे। अदृश्य दुनिया को खुद अनुभव कर सकेंगे।
घर बैठे शिवप्रिया के साथ साधना करने के नियम पहले ही बताए जा चुके हैं। साधक सरसों के तेल का दीप जलाकर बैठें। उसमें 1-2 बून्द चंदन तेल मिला लें। खुद चंदन का इतर लगाकर साधना करें। चंदन की सुगंध के जरिये ही साधक शिवप्रिया की चेतना के साथ जुड़ेंगे। रोज रात 9 से 10 बजे के बीच एक घण्टे की साधना पूरी करें।
आगे साधना संकल्प यहां बता रहा हूँ। उन्हें रोज दोहराएं।
दीप के समक्ष बैठकर संकल्प लें। भगवान शिव से साधना की सफलता का आग्रह करें। कहें- हे देवों के देव महादेव मेरे गुरुदेव आपको प्रणाम। आपको साक्षी बनाकर मै शिवप्रिया जी की गहन साधना में दूरस्थ रूप से सम्मिलित हो रहा हूँ। साधना की सफलता हेतु मुझे अनुमति, आशीर्वाद और सुरक्षा प्रदान करें। आपका धन्यवाद!
उसके बाद दैवीय उर्जा से शिवप्रिया के साथ जुड़ाव का आग्रह करें। कहें- हे दिव्य उर्जा आप मुझे मेरे गुरु भगवान शिव के चरणों से जोड़कर रखते हुए मेरे आभामंडल को शिव साधिका शिवप्रिया जी के आभामंडल से जोड़ दें। और साधना के दौरान लगातार जोड़े रखें। आपका धन्यवाद!*
उसके बाद बिना माला ॐ नमः शिवाय का जप आरम्भ करें। एक घण्टे बिना उठे जप पूरा करें। जप के समय उत्तर मुख होकर बैठें। नियम पूर्वक साधना करने वाले साधक शिवप्रिया की चेतना से जुड़कर सूक्ष्म जगत की यात्रा तक पहुंचेंगे। वहां होने वाली अनुभूतियों को ग्रुप में रोज शेयर करें। जिससे उनकी साधना की प्रगति का आकलन किया जाएगा। आवश्यकता हुई तो उनकी ऊर्जाओं को उपचारित किया जाता रहेगा।
मन्त्र जप पूरा होने के बाद दैवीय ऊर्जाओं से पुनः आग्रह करें। कहें- शिवप्रिया जी के साथ सम्पन्न हुई दिव्य साधना से प्राप्त दैवीय ऊर्जाओं आपको नमन है। आप मुझे और मेरे द्वारा इच्छित लोगों को तन से, मन से, धन से स्वस्थ, सुखी, सक्षम बनाएं। आपका धन्यवाद!
27 वें दिन की साधना में शिवप्रिया अपने सहस्रार चक्र पर बैठकर देर तक मन्त्र जप करती रहीं। जप के 6 घण्टे पूरे होने के बाद उनकी चेतना ने सूक्ष्म यात्रा शुरू की। डाइमेंशन बदलने पर उन्होंने खुद को छोटी बच्ची के रूप में पाया। मार्गदर्शक की तलाश में दौड़ी चली जा रही थीं। धीरे धीरे उम्र बढ़ती रही। तकरीबन एक घण्टे भागने के बाद वे अब की उम्र में पहुंच पायीं।
दौड़ते दौड़ते थक गईं। उर्जा हीन होकर जमीन पर गिर गईं। अचेत हो गईं। कुछ पलों बाद खुद को सूक्ष्म शरीर से बाहर देखा। स्थूल शरीर के बाद अब वे सूक्ष्म शरीर से भी बाहर थीं। ऐसा पहली बार हुआ जब उनकी चेतना सूक्ष्म शरीर से बाहर निकली।
सूक्ष्म शरीर से भी बाहर निकला जा सकता है, यह शिवप्रिया को नही पता था। इसलिये वे बहुत अचंभित थीं। तभी अदृश्य जगत के मार्गदर्शक आ गए। उन्होंने बताया सुरक्षा की दृष्टि से आगे की यात्रा सूक्ष्म शरीर के बिना ही करनी होगी। फिर शिवप्रिया का हाथ पकड़ा और तेज गति से अंतरिक्ष की तरफ चल दिये।
कुछ देर बाद वे एक लाल पीले ग्रह पर पहुंचे। वहां की ऊर्जाओं का स्तर बहुत अधिक था। थोड़ा आगे बढ़े। सामने एक विशाल शिवलिंग नजर आया। उसका तापमान बहुत अधिक था। इतना कि उस पर पड़ने वाला पानी उसी समय भाप बनकर उड़ जा रहा था। उसकी गर्मी सामने आने वाले लोगों को जलाकर भस्म कर देने वाली थी।
शिवप्रिया के मार्गदर्शक ने पूछा देवी आपने इस स्थान को पहचाना? शिवप्रिया ने इंकार में सिर हिलाया। मार्गदर्शक ने उनके तीसरे नेत्र पर अपना अंगूठा रखा। ऐसा होते ही तमाम पुरानी यादें वीडियो की तरह सामने आने लगीं। उन्हें याद आया कि सपने में अक्सर वे इस जगह को देखती आई हैं। यादों का सिलसिला पूर्व जन्म तक पहुंचा। शिवप्रिया ने पाया कि पिछले जन्म में उनकी साधना यहीं तक पहुंच कर रुक गयी थी। तब वे अपने सूक्ष्म शरीर के साथ यहां आयी थीं। शिवलिंग की तपिश में उनका सूक्ष्म शरीर झुलस गया। उनकी उर्जा नाड़ियां जलकर नष्ट हो गईं। जिसका सीधा असर उनके स्थूल शरीर पर पड़ा। उसी से उनकी मृत्यु हुई। शिवप्रिया ने वहां अपने पिछले जन्म की मृत्यु देखी।
अब वे समझ पा रही थीं कि इस जन्म में साधना के दौरान उनके मार्गदर्शक अधिक सतर्कता क्यों बरत रहे हैं। उन्हें बार बार सुरक्षा के नियम क्यों बताए जाते आये हैं। नियमित संजीवनी उपचार करके अपने तन मन मस्तिष्क और ऊर्जाओं को सक्षम बनाते रहने पर इतना जोर क्यों दिया जाता रहा है। अब उन्हें समझ आया कि आज उन्हें बिना सूक्ष्म शरीर के यहां क्यों लाया गया।
मार्गदर्शक ने शिवप्रिया से कहा अब आपको पिछले जन्म से आगे की साधना शुरू करनी है। उन्होंने उनसे नाभि में स्थापित शिवलिंग को निकालकर तपते शिवलिंग के पास रखने को कहा। शिवप्रिया ने ऐसा ही किया।
विशाल शिवलिंग की तपिस से शिवप्रिया का शिवलिंग जलकर पिघल गया। इस दृश्य को देखकर शिवप्रिया रो पड़ीं। उन्हें साधना के दौरान मिले अपने दिव्य शिवलिंग से बड़ा लगाव हो गया था। वहां उनके रोने का असर स्थूल शरीर तक दिख रहा था। मुम्बई के साधना कक्ष में मन्त्र जप रही शिवप्रिया की आंखों से आंसू झर झर बहने लगे। वे सिसक रही थीं। जैसे किसी प्रिय से विछोह हो गया हो।
कुछ देर बाद उनके मार्गदर्शक ने शिवप्रिया के सिर पर हाथ रखा और शिवलिंग की तरफ देखने को कहा। शिवप्रिया ने देखा तो पाया कि वहां उनके शिवलिंग का पुनर्निर्माण हो रहा है। कुछ ही पलों में शिवलिंग वापस अपने आकार में आ गया। मार्गदर्शक ने उसे विशाल शिवलिंग के पास से उठाकर शिवप्रिया के हाथ में रख दिया।
अपना शिवलिंग दोबारा पाकर शिवप्रिया बहुत खुश हुईं। उन्होंने तपते शिवलिंग से पूछा क्या आप शिव हैं? मुझे दर्शन दीजिये न। कृपया मुझे अपने सत्य से अवगत कराइये।
जवाब में सामने एक दरवाजा खुल गया। शिवप्रिया ने अपने मार्गदर्शक के साथ उसमें प्रवेश किया। अंदर जाते ही वे एनर्जी में बदल गए। छोटे चमकदार एनर्जी बॉल के रूप में नजर आने लगे। वहां करोड़ों करोड़ ऐसे ही एनर्जी बॉल थे। पूरा ब्रह्मांड उन एनर्जी बॉल से भरा था। ब्रह्मांड के हर कोने पर सिर्फ वे एनर्जी बॉल ही दिख रहे थे। फिर वे एकदम से तपते विशाल शिवलिंग के समक्ष पहुंच गए।
पूरे ब्रह्मांड का बस इतना सा ही सच है। शिवलिंग से आवाज आई। बाकी सच और झूठ सब भ्रम हैं। जिस रूप में चाहोगे मुझे उसी रूप में पाओगे।
इसके बाद अचानक उन्हें वहां से वापस भेज दिया गया। शिवप्रिया ने खुद को अपने सूक्ष्म शरीर के पास पाया। मार्गदर्शक ने उन्हें सूक्ष्म शरीर में प्रवेश कराया और विलुप्त हो गए।
शिव शरणं!

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