शिवप्रिया की शिव साधना…5

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शिवप्रिया की शिव साधना…5
दानवों की दुनिया में प्रवेश

[शिवदूत का हाथ छोड़कर शिवप्रिया ने गोल्डल चावी उठा ली. उससे सामने नजर आ रहे दरवाजे खोल दिये. एक दरवाजे में दानवाकार जीव थे. वे हमले के लिये झपटे. शिवदूत ने भयभीत शिवप्रिया को दानवों की दुनिया से बाहर खींचा।. कुछ क्षणों बाद उन्हें अपने सभी उर्जा चक्र सामने नजर आने लगे. संजीवनी उपचार की जानकार शिवप्रिया आगे की क्रिया देखकर हैरान थीं. कोई अदृश्य शक्ति उनके चक्रों का उपचार कर रही थी. उपचार की तकनीक अलौकिक थी.]
सभी अपनों को राम राम
शिवप्रिया की गहन शिव साधना के माध्यम से हम उच्च साधनाओं की बारीकियों को जान रहे हैं. उच्च आयामों में होने वाली सूक्ष्म शरीर की यात्राओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं.
तीसरे दिन साधना मंत्र का 5 घंटे जप होने के बाद उनकी सूक्षम चेतना उच्च आयाम के लिये शरीर से बाहर निकली. साधना में उस दिन क्या होने वाला है उन्हें इसके संकेत दिन में तीन चलचित्रों के द्वारा मिले थे. सूक्ष्म चेतना की यात्रा उसी अनुरूप आगे बढी. शिवदूत उन्हें लेकर शिव छवि के समक्ष गये. वहां से पुनः डाइमेंशन बदला.
शिवजी की आंखों से निकलने प्रकाश के कारण शिवप्रिया उस दिन भी उनका चेहरा न देख सकीं. कुछ देर बाद वहां अंधेरा छा गया. वह किसी अन्य डाइमेंशन में प्रवेश का समय था. अगले डाइमेंशन में उन्होंने खुद को एक नाव जैसी चीज पर बैठा पाया. अंधेरे के कारण कुछ नजर नही आ रहा था. सहायता पहुंचाने वाले शिवदूत उनके साथ नही थे. खुद को अकेला पाया. उनका मंत्र जप अनवरत चल रहा था. कुछ क्षणों बाद उनके द्वारा जपे जा रहे मंत्रों से सुनहरे रंग का प्रकाश निकलने लगा. जिससे वातारण में उजाला फैल गया.
उसी समय वहां दूसरे शिवदूत का प्रवेश हुआ. उन्होंने शिवप्रिया का हाथ थामा और बिना कुछ बोले एक दिशा में चल पड़े. तब तक शिवप्रिया शिवदूतों के साथ यात्रा करने की अभ्यस्त हो चुकी थीं. उन्होंने पता था कि शिवदूत बिना परिचय दिये, बिना बोले सहायता कर रहे हैं. सो वे बिना वार्ता उनके साथ चल पड़ीं.
आगे का राह बहुत कठिन थी. देखने में खतरनाक भी. ऊंचे पहाड़ की पतली पगदंडी पर चलना था. पगदंडी इतनी पतली कि एक बार में एक ही पैर आगे बढ़ाया जा सकता था. दूसरी तरफ हजारों फीट गहरी खाईं. कभी भी नीचे फिसलकर गिर जाने का खतरा. इस बार रास्ता बहुत लम्बा था. शायद कई हजार किलोमीटर।
वे चलते रहे.
आगे उनका प्रवेश पहाड़ों की बर्फीली सुरंग में हुआ. जहां बहुत ठंड थी. आगे ठंड लगातार बढ़ती जा रही थी. अत्यधिक ठंग के अहसास ने शिवप्रिया को विचलित भी किया. वह सुरंग आगे जाकर एक समुद्री सुरंग में खुली.
समुद्र में बनी सुरंग पारदर्शी थी. अब वे समुद्र के भीतर चल रहे थे. सुरंग के बाहर जगह जगह पानी के जीव नजर आ रहे थे. रोमांचित करने वाली राह थी.
आगे समुद्र बदल गया. अब समुद्र का रंग गुलाबी था. अर्थात अब वे एेसी दुनिय से गुजर रहे थे. जहां आसमान का रंग गुलाबी या लाल होगा. प्रायः जिस रंग का आसमान होता है समुद्र उसी रंग का दिखता है. पानी में पड़ने वाली आकाश की छाया ही समुद्र को रंगीन बनाती है. वहां भी सुरंग के बाहर पानी के जीव नजर आते रहे.
आगे एक बार फिर समुद्र बदला. इस बार पानी का रंग हरा था. सुरंग वही थी.
जहां सुरंग खत्म हुई वहां सुनहरे रंग की जाली सी बिछी थी. उसके पार दो दरवाजे नजर आ रहे थे. शिवप्रिया उन दरवाजों की तरफ आकर्षित होकर भाग पड़ीं. शिवदूत का हाथ छुट गया. सहायक शिवदूत ने जाली को पार नही किया.
सुनहरी जाली पार करने पर शिवप्रिया को गोल्डन रंग की एक चावी दिखी. उन्होंने उसे उठा लिया और एक दरवाजा घलकर उसमें प्रवेश कर गईं. दरवाजे के भीतर गहरी पीली रोशनी थी. वहां का वातावरण पड़ा ही रहस्यमयी थी. इतना की शिवप्रिया घबराकर बाहर निकल आयीं. घबराहट के कारण उन्होंमने बाहर आकर गोल्डन चावी से दूसरा दरवाजा खोल दिया.
उस दरवाजे के भीतर भी रहस्यमयी गाढ़ा पीला प्रकाश था। उसके बीच दो दानवाकार जीव थे. वे उन पर झपट पड़े. बुरी तरह डरी शिवप्रिया घबराकर बाहर की तरफ भागीं. तभी शिवगुरु की सहायता आ गयी. शिवदूत ने शिवप्रिया का हाथ पकड़कर दानवों की दुनिया से बाहर खींच लिया. दोनों दरवाजे पुनः बंद हो गये.
शिवदूत उन्हें सुरक्षित करके वापस सुनहरी जाली के दूसरी तरफ ले गया. डरी शिवप्रिया को समान्य होने में वक्त लगा. शिवदूत की सहायता मिलने के बाद भी वे डर के मारे आंखें बंद किये थीं.
कुछ क्षणों बाद बंद आंखों से उन्हें अपने उर्जा चक्र नजर आने लगे. अचानक कुछ चक्रों से उर्जा निकलने लगी और कुछ में बाहर से आने लगी. शिवप्रिया हैरान थीं. संजीवनी उपचार की जानकार होने के कारण वे इस प्रिक्रिया को समझ गईं. कोई अदृश्य शक्ति उनके उर्जा चक्रों का उपचार कर रही थी. जिन चक्रों में दूषित उर्जायें नजर आ रही थीं. उन्हें साफ किया जा रहा था. जिनमें उर्जा की कमी थी उन्हें उर्जित किया जा रहा था. चक्रों के जाग्रत होने तक यह क्रिया चलती रही.
बहुत कोशिश के बाद भी शिवप्रिया संजीवनी उपचारक को देख न सकीं. मगर अदृश्य उपचारक की उर्जा उपचार तकनीक बड़ी सटीक व अलौकिक थी. शिवप्रिया न सिर्फ उससे उपचारित हुईं बल्कि उसे याद करके सीख भी लिया.
तभी उन्हें आदेश मिला आज की साधना पूर्ण हुई.
मत्र जप स्वतः रुक गया. आंख खुली. साधना के आठ घंटे पूरे हो चुके थे.
आगे के दिनों का वृतांत जारी रहेगा.
शिव शरणं.

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