आँवला से हो जाता है दरिद्रता का नाश

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16 व 17 नवम्बर को मुम्बई में आँवला मन्त्र साधना

सभी अपनों को राम राम
जो बार बार आर्थिक समस्याओं का शिकार हो रहे हैं, दुर्भाग्य जिन्हें धनवान नही बनने दे रहा। उन्हें विधान सहित शिवलिंग पर आँवला जरूर चढ़ाना चाहिये। आँवला की ऊर्जाएं दरिद्रता की ऊर्जाओं को नष्ट कर देती हैं।
मां पार्वती बड़ी दयालु हैं। लोगों के दुख दूर करने के लिये भगवान शिव के साथ वे अक्सर ब्रह्मांड भ्रमण के लिये निकलती हैं। रास्ते में जो दीन दुखी दिखते हैं उनके दुख शिव जी से दूर कराती जाती हैं।
एक बार नन्दी पर सवार होकर शिव पार्वती भ्रमण के लिये निकले। रास्ते में एक बहुत गरीब व्यक्ति दिखा। उसकी दशा बड़ी ही दयनीय थी। मैले कुचैले फटे कपड़े, भूख से जर्जर हुआ शरीर, शरीर पर जगह जगह जख्म, जख्मों से खून का रिसाव। ऐसा जीवन जिससे मृत्यु बेहतर लगे।
उसकी दुर्दशा से मां पार्वती बहुत द्रवित हो गईं। उनका मन भर आया।
उन्होंने भगवान शिव से उसकी दुर्दशा का कारण पूछा। भगवान शिव ने बताया कि पूर्व जन्मों के कुछ अवांछित कार्यों के कारण उसे दरिद्रता का अभिशाप लगा है।
मां पार्वती से उसकी हालत देखी न गयी। उन्होंने शिवजी से उसकी सहायता का अनुरोध किया। भगवान शिव ने मना कर दिया। कहा सभी को अपने कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है।
मां पार्वती ने कहा संसार के सभी लोग हमारी ही संतानें हैं। उन्हें इतने दुख में आप कैसे देख सकते हैं। मै तो नही देख सकती। जब तक आप इसका दुख दूर नही करते तब तक मै यहीं रुकूँगी। कहीं न जाऊंगी।
ऐसा कहकर मां पार्वती वहीं बैठ गईं। दया भाव से उस दरिद्र दुखी व्यक्ति को देखने लगीं।
भगवान शिव समझ गए कि मां पार्वती उस व्यक्ति के दुख दूर करने की जिद नही छोड़ेंगी। उन्होंने माता लक्ष्मी का आवाहन किया। उनसे उस व्यक्ति को जीवन यापन भर का धन देने के लिये कहा।
माता लक्ष्मी ने कहा इसके भाग्य में धन नही है, सो उसे धन नही दे सकतीं। विनम्रता पूर्वक असमर्थता जताकर वे चली गईं। तो भगवान शिव ने मां पार्वती से कहा देखो देवी लक्ष्मी भी इसे धन न दे सकीं। इसकी सहायता सम्भव नही है। अब यहां से आगे बढिये।
उस दुखियारे की दुर्दशा पर मां पार्वती का मन बहुत उदास था। वे जानती थीं बेचारे को उन कर्मों की सजा मिल रही है जो इस जन्म में उसने किये ही नही। ऐसे में अगले जन्म कैसे सुधार सकेगा। जन्मों जन्मों तक उसे ऐसे ही रहना पड़ सकता है। उन्होंने शिव जी से कहा मै इसे ऐसी हालत में छोड़कर नही जा सकती। आपको कोई तो रास्ता निकालना नही पड़ेगा।
भगवान शिव मुस्कराए। वे जानते थे दुखियों का दुख हरने निकलीं पार्वती मानने वाली नहीं।
उन्होंने ब्राह्मण का वेश बनाया और उस व्यक्ति के पास गए। उसे शिवलिंग पर आँवला चढ़ाने का विधान समझाया। बताया कि ऐसा करने से तुम्हारी दरिद्रता नष्ट हो जाएगी और लक्ष्मी को तुम्हारे जीवन में आना ही पड़ेगा।
ब्राह्मण रूपी शिव द्वारा बताए विधान के अनुसार वह व्यक्ति शिवलिंग पर आँवला चढ़ाने चल पड़ा। मगर उसका दुर्भाग्य इतना प्रबल था कि उसे आँवले के फल ही नही मिले। ऐसे में वह सूखे पड़े आँवले के कुछ फल उठा लाया। उन्हें ही शिवलिंग पर चढ़ा कर दरिद्र भंजन प्रयोग सम्पन्न किया। उसके दरिद्रता के योग खत्म हुए। देवी लक्ष्मी को उसके जीवन में आना पड़ा।
अगली बार जब भ्रमण पर उधर से निकले तो उसकी बदली स्थितयों को देखकर मां पार्वती का मन खुश हो गया। उन्होंने भगवान शिव से सवाल पूछा शिवलिंग पर आँवला चढ़वाने की बजाय आप वैसे ही उस व्यक्ति पर प्रशन्न होकर लक्ष्मी जी को उसके जीवन में आने को बाध्य कर सकते थे। तो क्यों नही किया।
इस पर भगवान शिव ने बताया कि मैंने देवी लक्ष्मी को बाध्य नही किया। और न ही मेरी प्रशन्नता मात्र से उस व्यक्ति की स्थिति बदली। उसके कर्म से भाग्य बदला। उसने शिवलिंग पर आँवला के प्रयोग का कर्म किया। आँवला चढ़ाने से उसके जीवन में मौजूद दरिद्रता की नकारात्मक ऊर्जाएं आँवले के साथ शिवलिंग पर चली गईं। शिवलिंग द्वारा उन्हें नष्ट कर दिया गया। इस तरह वह दरिद्रता से मुक्त हुआ। यह देव प्रशन्नता का नही बल्कि ऊर्जाओं के उपचार का विषय है। इसे अपनाने वाले लोग देवी लक्ष्मी को प्राप्त कर ही लेते हैं।
16 और 17 नवम्बर 19 को मुम्बई आश्रम में
मै शिवलिंग पर आँवला चढ़ाने का विधान बताऊंगा।
साथ ही आँवला प्रयोग का मन्त्र सिद्ध कराऊंगा।
सबका जीवन सुखी हो
यही हमारी कामना है।
शिव शरणं!

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