शिवगुरु को एंज्वाय करने की कला सीखो

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*शिवगुरु को एंज्वाय करने की कला सीखो*
शिवप्रिया जी की सिद्धि का लाभ उठाओ

सभी अपनों को राम राम
हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मै आपका शिष्य हूं, मुझ शिष्य पर दया करें। जो लोग मुझमें विश्वास करते हैं उनका जीवन खुशियों से भरा रखें, मुझ पर ऐसी दया करने के लिये आपका धन्यवाद!

*गुरु पूर्णिमा की सभी को दिली शुभकामनाएं। शिवगुरु हर क्षण तुम्हारे साथ हैं, इस सच्चाई को मन में कभी धूमिल न होने देना*.

जीवन-मरण, यश-अपयश विधाता के हाथ है। इसे कम या ज्यादा कर पाना किसी के वश की बात नही।
बाकी का सारा जीवन तुम्हारा है उसे एंज्वाय करो, शिवगुरु तुम्हारे हैं, उन्हें एंज्वाय करो।
*जिसने शिव को एंज्वाय करना नही सीखा, वह अधूरा है, उसकी खुशियां अधूरी हैं। इसे जितनी जल्दी हो सके सीख लो।*
यह आर्ट शिवप्रिया जी सिखाएंगी।

क्योंकि मै तो अब स्वार्थी हो चला हूं, मुझमें अपने अगले जन्म के निर्माण का स्वार्थ व्याप्त हो गया है। सो सारा समय अपने ऊपर ही खर्च करने के लालच ने घेर लिया है मुझे।

लेकिन अध्यात्म के सफर में तुम अकेले नही हो, शिवप्रिया जी तुम्हारे साथ हैं।
तुम्हें बताता चलूं कि शिवप्रिया जी ने एक ऐसी साधना पूर्ण कर ली है जिसे 19 बरसों में मै कई कोशिशों के बाद भी पूरी न कर सका।
कई ऋषि-मुनि भी इसे पूरा न कर सके।
ऋषि उपमन्यु को ज्ञात-अज्ञात जानने की यह साधना सिद्धि प्राप्त थी। उन्होंने आजीवन इस साधना को जारी रखा।
इस सिद्धि के द्वारा ऋषि उपमन्यु ब्रह्मांड को डिकोड कर लेते थे, भविष्य में कब कहां क्या होने वाला है, वे जान लेते थे। उनके मुंह से निकले आशीर्वाद और श्राप अक्षरशः फलित होते थे, उनके दर्शन मात्र से लोगों के जीवन की नकारात्मकता नष्ट हो जाती थी, खुशियां मिल जाती थीं। जिस व्यक्ति के बारे में वे जैसा सोचते थे वैसा होने लगता था, उनका स्मरण करने मात्र से लोगों के काम बन जाते थे।
6 साल की इस साधना में निरन्तरता अनिवार्य होती है। पिछले 19 बरसों में मैने इसके लिये कई बार कोशिश की। मगर कभी भी 6 साल पूरे न कर सका। किसी न किसी कारण से साधना बीच में ही भंग होती रही। एक बार 5 साल 2 माह पूरे होने के बाद भंग हुई।
ऐसा सिर्फ मेरे साथ नही हुआ, अनगिनत साधकों और ऋषियों-मुनियों के साथ भी ऐसा होता आया है।
शायद इसे पूरा करने के लिये प्रबल प्रारब्ध की अनिवार्यता हो।
शिवप्रिया जी ने इस दिव्य साधना को 2011 में आरम्भ किया था। तब से उनकी साधना अनवरत जारी है। अध्ययन के व्यस्ततम दौर में भी उन्होंने इसे छूटने नही दिया। महादेव ने उनकी साधना स्वीकारी।
वे इसे आजीवन जारी रखना चाहती हैं।
मै जानता हूँ कि यह कितनी बड़ी बात है, कितनी बड़ी उपलब्धि है।
इसीलिये उनकी साधना सिद्धि के बल पर महासाधना को बंद कर पाने का साहस जुटा पाया।
महासाधना के बन्द होने पर वे *अमृत संजीवनी साधना* कराने को मान गईं। अभी वे IIT मुम्बई से पी एच डी की तैयारी कर रही हैं। जिसमें बहुत अधिक समय खर्च होने वाला है, फिर भी उन्होंने अमृत संजीवनी साधना का आग्रह स्वीकार कर लिया है। भगवान शिव को इसके लिये करोड़ों धन्यवाद।
कल 17 जुलाई 19 को सुबह 7 बजे से अमृत संजीवनी साधना आरम्भ होगी। विधान आज ही आपको मिल जाएगा।
*अमृत संजीवनी साधना* में ऊर्जाओं के उच्च स्रोत के साथ साधकों की कनेक्टिविटी के लिये शिवप्रिया जी का शिव युक्त फोटो उपयोग किया जा रहा है।
उस फोटो के समक्ष बैठकर विश्वास के साथ जो भी मांगा जाए वह पूरा हो, ऐसा प्रभाव देखने को मिलेगा शिवप्रिया जी की साधना के कारण।
मै चाहता हूं कि तुम सब इसका लाभ उठाओ।
*शिव शरणं*

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