अश्वमेघ साधना: राजाओं से जीवन की राह

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अश्वमेघ शब्द से सभी परिचित हैं।
आज मै आपको इस नाम की साधना से परिचित करा रहा हूँ। अध्यात्म विज्ञान के जानकार इसे उच्चतम साधनाओं की श्रेणी में गिनते हैं। यह जीवन जीतने की साधना है।
सुखी जीवन का भोग और फिर मोक्ष, यह इस साधना का प्रमुख उद्देश्य है।
जो साधक राजाओं से जीवन जीने की चाह रखते हैं उन्हें इसे जरूर करना चाहिये।
वास्तव में यह साधना अपने नाम के अनुरूप साधक को शिखर तक पहुंचाने में सक्षम है।
कुछ शास्त्रों में इस साधना को रक्षा विधानम साधना के रूप में परिचित कराया गया है।
इस साधना में प्रयुक्त मन्त्र अत्यंत प्रबल और प्रभावकारी है।
इसके बारे में व्याख्यान करते हुए भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं हे देवी यह हमारा प्रत्यक्ष स्वरूप है जो प्राणी इस मंत्र साधना विधान को अपनाता है तीनों लोकों में उसकी बराबरी किसी से नही हो सकती है, उसका कभी अहित नही हो सकता, वह प्रत्यक्ष रूप से शत्रुहीन होकर सभी तरह के सुखों का भोग करता है, इस लोक में ऐसा साधक सदैव ही उच्च पारिवारिक सुखों का भोग करते हुए अंतकाल में परलोकगामी होता है।
मै यहां आपको अश्वमेघ साधना के औरिक विधान की जानकारी दूंगा। क्योंकि तांत्रिक या वैदिक विधान से की जाने वाली उच्च साधनाएं लम्बी और कठोर नियमों वाली हो जाती हैं। जिस कारण अधिकांश साधक इन्हें नही निभा पाते।
औरिक विधान में साधक के आभामंडल, ऊर्जा चक्रों और कुंडलिनी को ऊर्जा तंतु के जरिये इष्ट की ऊर्जाओं के साथ कनेक्ट कर दिया जाता है।
मन्त्र को साधक के ऊर्जा शरीर और रोम रोम में स्थापित कर दिया जाता है। साधक की अवचेतन शक्ति को देव ऊर्जाओं के साथ जोड़ दिया जाता है। साथ सिद्धि हेतु उसकी प्रोग्रामिंग कर दी जाती है।
उपरोक्त विधान से साधक मन्त्र जप शुरू करते ही देव ऊर्जाओं से जुड़ जाता है। उसके साथ 33 लाख से अधिक रोम छिद्रों से भी मन्त्र जप हो रहा होता है।
ये स्थितियां साधना को सुगम और सिद्धि को सरल बना देती हैं।
अश्वमेघ साधना में मर्यादाएं अनिवार्य हैं। उनका पालन करने वाले साधकों की बराबरी नही की जा सकती। साधक मर्यादाओं का पालन कराया जा सके, इस हेतु साधना में सीमित संख्या रखनी की मजबूरी है।
साधकों को आरम्भ से ही लाभ नजर आने लगे इसके लिये साधना में धनदा यन्त्र को शामिल किया जा रहा है।
इच्छुक साधक तत्काल धनदा यन्त्र का निर्माण करके उसे सिद्ध कर लें। फिर यन्त्र को अपने मूलाधार और अनाहत चक्र के साथ कनेक्ट कर लें। यन्त्र और उसे सिद्ध करने की जानकारी मन्त्र महार्णव या डामर तंत्र से प्राप्त कर लें।
यन्त्र तैयार होते ही साधकों को व्यक्तिगत रूप से मुहूर्त और साधना विधान की जानकारी दी जाएगी।
सार्वजनिक रूप से साधना विधान की जानकारी इस लिये नही दे रहा हूँ क्योंकि यह अति गोपनीय साधनाओं में से एक है। इसे करने वाले साधक यदि मर्यादाओं का उलंघन करते हैं तो दोष का एक भाग बताने वाले पर भी जाता है।
जिन साधकों के यन्त्र तैयार होकर सिद्ध हो जाएं वे 9250500800 पर वट्सअप के द्वारा तत्काल जानकारी दें। उनकी साधना तुरन्त आरम्भ करा दी जाएगी।
अश्वमेघ साधना….
इष्ट- भगवान शिव
दीपक- सरसों के तेल का
सुगन्ध- कोई भी
माला- रुद्राक्ष माला
आसन- लाल
वस्त्र- सफेद
समय- सुबह व रात
अवधि- कार्यसिद्धि तक
मन्त्र संख्या- 5 माला प्रतिदिन
भोग- सफेद मिठाई
पुष्प- सफेद फूल
दान- भोजन का
परहेज- आलोचना
परिणाम- सुख भोग और मोक्ष
साधना संपर्क- 9250500800 (only whatsapp)

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