मृत्युंजय शक्तिपात-3

खुद को बंद आंखों से देखने की कोशिश करें


48331220_733947276992023_3461747484571729920_n.jpgसभी अपनों को राम राम
शक्तिपात ग्रहण करने की श्रेष्ठ स्थिति प्राप्त करने के लिये खुद को बंद आंखों से देखने की कोशिश करनी चाहिये. आगे चल कर यह स्थिति आत्म साक्षात्कार में बड़ी सहायक सिद्ध होती है.
इसे लिये शक्तिपात के दौरान आंखें बंद करके बैठें. ध्यान अपने नाभि चक्र पर केंद्रित करें. यहां उर्जाओं का भंडारण होता है. कुछ समय बाद नाभि चक्र पर उर्जा का संचरण महसूस होता है. ध्यान वहीं लगाये रखें. कालांतर में नाभि से निकलती छोटी आकृति की अनुभूति होती है. धीरे धीरे यह आकृति सामने आकर स्थिर हो जाती है.
शुरू शुरू में आकृति प्रकाश के रूप में नजर आती है. धीरे धीरे उसकी पहचान सामने आने लगती है. स्पष्ट होने पर पता चलता है कि स्वयं वह व्यक्ति ही सामने बैठा है. जिसपर आसमान से दिव्य उर्जाओं की बरसात हो रही होती है. शत्किपात की उर्जायें सामने स्थित अपने सूक्ष्म शरीर की उर्जा नाड़ियों में प्रवाहित होती दिखती हैं.
शक्तिपात की सह स्थिति बड़ी ही सुखकारी होती है.
जो साधक अध्यात्मिक रूप से जितना सक्षम होता है वह उतनी ही जल्दी खुद को देखना आरम्भ कर देता है. कुछ गुरू साधक के सामने स्थित सूक्ष्म चेतना को अपने साथ लेकर ब्रह्मांड भ्रमण करा देते हैं.
मृत्युंजय शक्तिपात में शामिल हो रहे सभी साधक खुद को देखने का अभ्यास शुरू करें.
इसके लिये आरम्भ में कल्पना का सहारा लें.
कल्पना ज्ञान से बड़ी होती है.
कल्पना उत्पत्ति का कारण भी बनती है.
खुद को सामने स्थिति होने की मजबूत कल्पना के लिये यहां एक चित्र दोबारा दे रहा हूं. इसे ध्यान से देखें. कई बार देखें और अपने मन में बसा लें. चित्र में मै जिस आकृति पर शक्तिपात कर रहा हूं वहां खुद के होने की कल्पना करें. काम आसान हो जाएगा.
जल्दी ही कल्पना साकार रूप में परिवर्तित होती जाएगी.
एक दिन सच में खुद को अपने सामने बैठा देखने में सक्षम हो जाएंगे.
अध्यात्म में इस स्थिति को बहुत महत्व दिया जाता है. सौभाग्य जगाने वाला माना जाता है. सामान्य लोगों के लिये इसे दुर्लभ माना जाता है. मृत्युंजय शक्तिपात ले रहे साधकों को मै सामान्य नही मानता. आप सबको इसे दुर्लभ से सरल बनाना है.
दिन में जितना चाहें इसका अभ्यास कर सकते हैं.
अपनी अनुभूतियों में दिन प्रति दिन इस दिशा में होने वाली प्रगति का विवरण दें.
जो लोग शक्तिपात के दौरान होने वाले अनुभव शेयर नही कर पा रहे या किसी गरीब को भोजन दान नही कर पा रहे, उन्हें खुद को शक्तिपात से तत्काल अलग कर लेना चाहिये. क्योंकि मै उनकी उर्जाओं का विशलेषण नही कर पा रहा. यैसे में शक्तिपात की अधिकता नुकसान का कारण बन सकती है.

सबका जीवन सुखी हो, यही हमारी कामना है.
शिव शरणं

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