गुरू पुर्णिमा पर कुडंली जागरण साधना……. 2

राम राम
गुरू पुर्णिमा पर कुडंली जागरण साधना……. 2

प्रणाम मैं सोमेश

शिवप्रिया जी ने सभी साधको की ऊर्जाओ को साधना के लिए तैयार कर दिया और संजीवनी उपचार सिखाया अब आगे

गुरूजी और गुरू मॉ हमारे बीच आ गये पूरा ओडिटोरियम हर हर महादेव से गुज उठा | सभी पूरे उत्साह और जोश से हर हर महादेव का नारा लगा रहै थे | साधना समिति ने गुरूजी, गुरू मॉ, शिवप्रिया जी और विष्णु प्रिया जी का एक फुलो से भरी माला से स्वागत किया | फूलो की माला मे गुरूजी का परिवार बहुत ही सुन्दर लग रहा था | फिर पंडित ने गुरू वंदना से गुरूजी का स्वागत किया और गुरूजी को मुकुट पहनाया गया | फिर आयी बारी गुरूजी को सिहगासन देने की साधना समिति ने गुरू पुर्णिमा के अवसर पर गुरूजी को एक बहुत ही सुन्दर सिहागासन दिया | ऐसे साधना समिति ने गुरूजी का स्वागत किया और सभी अपने अपने स्थानो पर बैठ गये | गुरूजी ने सभी को भगवान शिव का शिष्य बनया | और शिव शिष्य होने के फायदे सभी को बताये |
फिर सभी साधको को भोजन के लिए भेजा गया | साधना समिति ने भोजन की बहुत ही अच्छी व्यवस्था की हुई थी | सभी भोजन करके अपने अपने स्थान पर पहुच गये थे |

साधना मे दो तरीके के साधक बैठे थे | एक वो जिनके पास कुडंली जागरण यंत्र था जिनकी कुडंली जागरत होकर उपर की और बडेगी और एक वो जिनके पास यंत्र नही था और उनकी कुडंली का सिर्फ जागरण होगा | फिर गुरूजी ने कुडंली जागरण रुद्राक्ष को माध्यम बना कर सभी के ग्रह नक्षत्रो के प्रभावो की दुषित ऊर्जाओ को खतम कर दिया | इसके लिए गुरूजी ने सम्धर्मि ऊर्जोओ के विज्ञान का प्रयोग किया | इस विज्ञान को बहुत ही बारिखी से सम्झाया भी | फिर गुरूजी ने देव बाधा, पितृ दोष ओर तंत्र को समझाया बारिखी से समझाया | गुरूजी ने बताया की क्यु आज देव दोष और पितृ दोष आम हो चला है |इससे जो भी भम्र सभी के मन मे थे वे टूट गये | और फिर गुरूजी ने पारद शिवलिंग का प्रयोग कर के देव बाधा, पितृ दोष, तंत्र और तमाम उपरी बाधाओ से सभी साधको को मुक्त करा दिया | सभी के चहरे चमक उठे थे और मन बहुत ही जादा प्रसन्न हो गया था | गुरूजी ने यह भी सिखाया की आगे जरूरत पडने पर सभी साधक कैसे यह उपाय कर सकते है |

फिर बारी आयी कुंडली जागरण की गुरूजी ने कुडंली क्या है…..कैसे काम करती है ……इसका महत्व क्या है…….क्यो यह इतनी बडी शक्ति है…..क्यो जीवन मे इसका महत्व अधिक है जैसी सभी बातो को बताया | गुरुजी ने समझाया की कुडंली जागरण क्या है और कुडंली आरोहण क्या है और कैसे कुडंली जागरत होने के बाद इसान को राजा बना देती है, शिव बना देती है, कैसे इसान कुडंली जागरण के बाद सब कुछ जान लेता है और कैसे बह्म ज्ञानी हो जाता है | गुरूजी ने जो विज्ञान बताया वह ना पहले कभी सुना था ना ही जाना था | इस विज्ञान को सुनकर सभी हैरान थे | गुरूजी के कुडंली के बारे मे सब कुछ बहुत ही आसान तरीके से समझया | अब गुरूजी शक्ति पात करके सभी को जगाने वाले थे | इसके लिए उन्होने शिव प्रिया जी को नियुक्त किया | और कहा की शिवप्रिया जी आपकी कुडंली जागरण करगी और मै सब पर नजर रखुगा क्युकी उर्जाओ का प्रवाह बहुत तेज होगा | साधको ने यंत्र को धारण कर लिया | और शिवप्रिया जी और पंडित जी तैयार हो गये | पंडित जी ने रुद्राअभिषेक शुरू किया और शिव प्रिया जी ने सभी की कुडंली को शिवलिंग पर बुला लिया | रुद्राअभिषेक के जरीये शिवप्रिया जी सभी की कुडंली को संचित कर रही थी उसे पोषित कर रही थी | 1 घंटे तक रुद्राअभिषेक चला | सभी की कुडंली को पोषित किया जा चुका था | अब गुरूजी कुडंली जागरण के लिए शक्तिपात करने के लिए तैयार हो गये | सभी साधक आखे बंद कर के बैठ गये और गुरूजी ने कहा की शक्तिपात के दौरान अगर कोई तकलिफ बैचनी हो तो घबराये नही मैरी नजर आप सब पर होगी | और गुरूजी ने शक्तिपात शुरू किया | शक्तिपात के बाद सभी ने धीरे धीरे अपनी आखे खोली | गुरूजी ने सभी को शुभकामनाये दी और कहा लगभग सभी की कुडंली जाग गयी है | यह गुरूजी की ही महनत थी की सभी की कुडंली जाग गयी गुरूजी सभी की कुडंली जागरण के लिए ढेड महिने से साधना कर रहै थे |गुरूजी ने कहा अब आपको जीवन मे खुश रहना है | जिनके पास यंत्र था उनकी कुडंली को राह दिखा दी गयी है | और गुरूजी ने कुडंली शक्ति से काम लेने के लिए और उसे बह्म चक्र तक पहुचाने के लिए कुछ अभ्यास बाताये जो की सभी साधको को करने है |

कुडंली जागरण के बाद मन मे एक नया जोश जा आ गया था | मन बहुत प्रसन्न था | मन मे बहुत खुशी थी एसी खुशी जोकी रुकने का नाम ही नही ले रही थी | अब जाते सभी सभी साधक बहुत ही खुश दिखाई दे रहे थे | साधना सिमिती बहुत ही सुन्दर सुन्दर भजन कर रही थी जो की पूरे वातावरण शिवमय बाना रहा था | जाते समय सभी साधक गुरूजी के चरण स्पश करते हुए लोट रहै थे और गुरुजी अपनी बहुत ही प्यारी मुस्कान के साथ आशिर्वाद के रुप मे सभी को फूल दे रहै थे | गुरूजी की मुस्कान हमेशा ही मन को भाने वाली होती है | गुरूजी ने कहा की आप सब कम से कम अगले 4 घटे तक मुस्कुराते रहै आगे के 40 दिन की जिम्मेदारी मेरी…….
मेरी तो खुशी का कोई अंत ही नही था | एक अजीब ही खुशी हो रही थी | मन इतना खुश पहले कभी नही हुआ था | वो खुशी अभी तक भी हो रही है | गुरू पुर्णिमा का उत्सव सभी के जीवन मे खुशिया हमेशा बनाये रखेगा | सभी का जीवन सुख समृद्धि से भर ही जायेगा | अब सभी अपना जीवन खुद रच सकेगे | सम्सया नाम की कोई चीज जीवन मे नही रहेगी | इन सब के लिए गुरूजी, शिव प्रियाजी और मृत्युजंय टीम का बहुत बहुत धन्यवाद |

अगले 2 दिन भी साधको के लिए बहुत ही दिव्य रहै | शिव प्रिया जी ने साधको को कायाकल्प साधना, ज्ञात अज्ञात जानने की साधना, संजीवनी उपाचार और राज श्नी योग जैसी बहुत ही दिव्य और अद्भुत साधना करायी | कल मै आपको बतायऊगा कैसे शिव प्रिया जी ने सभी साधको की मुलाकात भगवान शिव से कारायी और सभी ने भगवान शिव से अपने प्रशन का जबाब लिया तब तक के लिए राम राम….

धन्यवाद |
क्रमश:

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