प्रारब्ध चक्र

इच्छापूर्ति, स्वास्थ, त्वरित निर्णय का केंद्र नाभि चक्र व्यक्ति की उर्जाओं अर्थात् शक्तियों का स्टोर रूम जैसा होता है.  व्यक्ति आकस्मिक निर्णय यहीं से लेता है. इसके ठीक होने पर स्वास्थ उत्तम रहता है. यहां की बची हुई उर्जायें सहस्रार चक्र पर जाकर इच्छा पूर्ति करती हैं. इसी कारण इच्छाओं की पूर्ति के लिये व्रत रखे जाने का विधान प्रचलित है.

इस चक्र के बिगड़ने पर पाचन तंत्र खराब होता है. पेट सहित शरीर के अनगिनत रोग उत्पन्न होते हैं. व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय नही ले पाता. इच्छायें पूरी होते होते रह जाती हैं.


यदि आपको चक्र ठीक करने नही आते तो इसे ठीक रखने के लिये आप एनर्जी रिपोर्ट या संजीवनी उपचार का सहारा ले सकते हैं. घर बैठे एनर्जी रिपोर्ट बनवाने या संजीवनी उपचार के लिये आगे दिये

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